रुख़्सत

वादे निभाने में हम इतने उलझ गये,

पता ही ना चला कब तुम इतने बदल गये।

तुमसे मिलकर खुश रहने के अरमान जितने थे बुने,

तुम्हारी बेवफाई से एक पल में धूल में मिल गये।

किसी और के लिये तुम तो हमें एक पल में भूल गये!

लेकिन हम फिर भी तुम्हें यहाँ खुश देखने का वादा लेकर,

रूह के साथ वहीं-कहीं आसमान की ओर रुख़्सत हो गये…

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विडम्बना

विडम्बना तो देखिये आज के दौर की-

ईश्वर की रचि इस सृष्टी को अपने कुकृत्यों से जीते-जी आदमी ने नर्क बना डाला।

इतना कि स्वर्ग से आई गंगा भी इसी लोक सी काली पड़ गयी!

फिर भी ऊसी गंगा को स्वर्ग-जल मान कर, आदमी उसमें अपने पाप धो कर मरणोपरान्त स्वर्ग में वास चाहता है!

उसने…

एक शख्स जिसे उसने अपने अस्तित्व से तौला था,

अपना नाम भूलकर उसके नाम से कहलाने का सपना देखा था,

उसी बदशख्स ने उसके जिस्म को इस्तेमाल कर उसकी रूह को टुकड़ों मे तोड़ा था…

उसके सम्मान को लज्जित कर उसे वस्तु कि तरह छोड़ा था…

और दुनिया ने भी सिर्फ उसके प्यार को उसकी चरित्रहीनता की नज़र से देखा था…

लेकिन उसकी रूह के टूटे हर एक टुकड़े से निकलते दंशित प्यार के काले रंग से,

किस तरह उसने उन रूह की दरारों को काले अंधेरे में छिपाया था, ये सिर्फ रब ने देखा था।।

Lose

Being with some other woman, other than the one whom you claim be,by words that she is yours, Doesn’t make you a ‘man’.

It make you Lose…

Your self-esteem, your values, your character. 

You didn’t get LOVE..

You gained LIES…deceit and stolen affections.

Which didn’t belong to YOU.

And in the end one day(it might be the last day of your life) but for sure you will realize that the girl whom you betrayed and left as an option could have been the one to be holding your hand and saying “I am with you” when this mortal world would be about to reject you and you could have been resting your head in her heveanly lap just if you could have been all the way loyal to her…