याद

कितनी बार कहा है,

यादों में क्यूँ आते हो तुम!

कितनी बार कहा है!

यादों में क्यों आते हो तुम?

आँखें मेरी भर के…

साँसें क्यूँ ले जाते हो तुम…

दर्द

सुकून में है वो,

जिसके लफ्जों में दर्द बसता है…

बेचैन तो वो है,

जिसका लिखकर भी दर्द नहीं निकलता…

दुनिया

मालूम नहीं था

इस तरह छोड़ जाओगे

मुझे दुनिया बोल कर

दुनिया से चले जाओगे…

दौर

वो दौर भी आया ज़िन्दगी में

जब मुझे अपनी पसंद से

नफरत हूई…

Create a website or blog at WordPress.com

Up ↑