वादा

आज की इस तारीख की ख़ासियत का तुझे इल्म भी है?

 आज पूरे हुए उसी पुराने वादे का मन में ज़रा ज़िक्र भी है?

 जिसको सर आँखों पे रख हम हर रोज़ तनहाई को आब की तरह पी गये,

ये बता जान-ए-जिगर मेरे उस प्यार के लिये तेरे दिल में इज्जत की ज़रा सी किश्त भी है?