लम्हा

लम्हा वो नहीं जब तुम हमारे पास आए थे।

लम्हा वो नहीं जब तुमने हम पर पूरी तरह ग़ौर फरमाए थे।

लम्हा वो भी नहीं जब तुमने हमारी तारीफ़ों के गज़ल गाये थे।

लम्हा तो सिर्फ वो था जब आज तुम दिल से मुस्कुराये थे।।