त्याग

आज फिर से तुम्हारी यादों का दिया जलाया है हमने,

ना जाने कितनी बार इन अश्कों से अपना दामन भिगाया है हमने।

फिर भी हर साल कि तरह इस सालगिरह भी अपना फर्ज़ निभाया है हमने,

पत्नि की तरह तुम्हारे धोखे को भी दुनिया के सामने मजबूरी का नाम दिलाया है हमने।।

 # किसी भूल-चूक के लिये छमा। परिवेश की स्थिति को देखते हुए शब्दों से उकेरे हुए कुछ विचार।☺

दर्द का मर्ज़

दुखों का सिलसिला तो तब ख़त्म हुआ,

जब उसके प्यार ने हि उसे दर्द दे दिया।

आखिर उसे “हर दर्द से दूर” के वादे के मुताबिक,

धोखा देकर हर छोटे दर्द का मर्ज़  दे दिया!